: कांग्रेस को शिकस्त देने लिए विजयपुर में भाजपा ने प्रचार अभियान तेज किया...
Thu, Nov 7, 2024
मंत्री राकेश शुक्ला और उनकी पलटन ने संभाला थल मोर्चा….
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आदिवासी,युवा वर्ग के बाद ब्राह्मण बेल्ट में घुसी राकेश शुक्ला और उनकी पलटन…….
शुक्ला की रणनीति से कांग्रेसी नेताओं में मचा कोहराम……..
श्योपुर
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संवाददाता
मध्यप्रदेश में दो विधानसभा क्षेत्रों पर हो रहे उपचुनाव कि मतदान तारीख का काउंटडाउन शुरू हो गया है, मतदान 13 नवंबर को होना है यानि कि मतदान होने में 6 दिन ओर शेष हैं। विजयपुर विधानसभा के उपचुनाव में महाकाल की नगरी के सेवक और प्रदेश के "सरकार", संगठन के "सुप्रीमो" और "मामा"की ख्याति लिए केंद्रीय मंत्री शिवराज के साथ ग्वालियर चंबल इलाके में "अजातशत्रु" नरेंद्र सिंह के साथ प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री एवं भाजपा के कद्दावर नेता राकेश शुक्ला "चुनावी बार" में अपनी-अपनी "चेक पोस्ट" पर अपनी "पलटनों" के साथ मोर्चा संभाले हुए हैं।
भाजपा की इसी पलटन(थल )के कमांडर ऑफिसर राकेश शुक्ला अपनी चेक पोस्ट पर अपने दायित्व के साथ कांग्रेस की पलटन में सेंधमारी की व्यूह रचना लिए जनता के बीच मन में "घुसपैठ" कर रहे हैं।राकेश शुक्ला और उनकी पलटन ने विरोधी कांग्रेसी पलटन में "कोहराम"मचा रखा है।
राकेश शुक्ला ने पहले आदिवासी बाहुल्य इलाकों में घुसपैठ करते हुए आदिवासी लोगों के बीच "राम"के लिए कमल की छाप छोड़ी है तो दूसरा अहम वर्ग युवाओं के बीच चाय पर चर्चा आदि संवाद कर युवाओं को भाजपा की तरफ मोड़ने का "काम" किया है। तो वही मंत्री राकेश शुक्ला और उनकी पलटन ने जातिगत समीकरणों को साधने की शुरुआत ब्राह्मण वर्ग से शुरू कर दी है।
विजयपुर के उपचुनाव में जहा वायु मार्ग से प्रदेश के सरकार, संगठन के सुप्रीमो और पार्टी के दिग्गज नेता "वायु सेना" का काम कर रहे हैं तो राकेश शुक्ला जमीन पर रहकर "थल सेना" का काम कर रहे हैं। बीते बुधवार विजयपुर में वायु मार्ग से मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विजयपुर की धरती पर विकास की बात करते हुए बमबारी की तो वही शाम को विजयपुर में मंत्री राकेश शुक्ला और उनकी पलटन के नेतृत्व में ब्राह्मण वर्ग के वोटरों को साधते हुए मंच से जोरदार फायरिंग की।ब्राह्मण वर्ग के वोटरों को साधते हुए बंकर फायरिंग में कांग्रेस पार्टी की पलटन के अंदर भगदड़ मच रही है।
विजयपुर विधानसभा में 2 लाख 40 हजार मतदाता अपने वोट का इस्तेमाल करेंगे। जिसमें लगभग 20 हजार ब्राह्मण वर्ग के मतदाता हैं जो परिणाम को प्रभावित करते हैं। ऐसे में पंडित राकेश शुक्ला और उनकी पलटन को ब्राह्मण वर्ग के लोगों को एकजुट कर भाजपा के कमल के प्रति जो "टॉक्स"दिया था।उसमें भाजपा कुछ हद तक सफल हो रही है। ब्राह्मण वर्ग में कितनी सेंधमारी हुई। यह तो 23 नवंबर को पता चलेगा लेकिन यहा एक बात मौजूँ है कि पिछली बार हुए लोकसभा चुनावो के पूर्व राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और प्रदेश के कद्दावर नेता राकेश शुक्ला को ग्वालियर चंबल इलाके की लोकसभा सीटों पर पार्टी के प्रति ब्राह्मण वोटरों को साधने का जो मिशन दिया गया था। वह काफी हद तक लोकसभा चुनाव के परिणामो में देखने को मिला था। ग्वालियर ग्वालियर चंबल संभाग की सभी सीटों पर ब्राह्मण वोटरों की बदौलत मिशन मोदी कामयाब हुआ था।अब एक बार फिर पार्टी हाई कमान ने मंत्री राकेश शुक्ला पर भरोसा करते हुए ब्राह्मण वर्ग को साधने का दायित्व दिया है। बुधवार की शाम विजयपुर में हुए ब्राह्मण सम्मेलन में प्रदेश के पार्टी सुप्रीमो विष्णु दत्त शर्मा और भाजपा प्रत्याशी रामनिवास रावत के साथ ब्राह्मण बेल्ट के प्रमुख कर्ताधर्ता मंच पर एकजुट हुए। नेताओं का संबोधन भी हुआ। फोटो सेशन भी हुआ लेकिन संबोधन और फोटो सेशन के बीच जो व्यक्ति "सूत्रधार" की भूमिका में नजर आया वह कोई और शख्स नहीं था।वो था राकेश शुक्ला। वैसे भी भाजपा में रणनीतिकार हमेशा परिदृश्य से "ओझल" रहता है लेकिन यदा- कदा झलक दिख ही जाती है ।जिसे हम नहीं कह रहे मंच पर खींचा गया फोटो कह रहा है। एक ओर फोटो में बीडी शर्मा का संबोधन हो रहा है।जिसमें ब्राह्मण समाज की आन बान शान लिए साफा पहने विष्णु दत्त शर्मा माइक की कमान संभाले हुए हैं। तो मंत्री राकेश शुक्ला बिना साफा के भी अपनी "रणनीति" बनाने में भाजपा के "राम" के साथ "मशगूल" है।
: विजयपुर उपचुनाव : चुनाव चाय और चश्मा
Tue, Nov 5, 2024
मंत्री जी की चाय की चुस्कियां और सादगी बनी विजयपुर के चुनाव में चर्चा का विषय….
https://youtu.be/0W7RXVHKTds?si=x39Wp5W_dPILHIIk
वीडियो भी देखें....
श्योपुर
- संवाददाता
मध्यप्रदेश के चंबल इलाके की विजयपुर विधानसभा का उपचुनाव जोर पकड़ता जा रहा है इस विधानसभा सीट पर 13 नवंबर को मतदान होना है। इस चुनाव को जीतने के लिए भाजपा कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ रही है। पूरी विधानसभा में जहा भाजपा ने अपनी चुनावी शतरंज बिछा दी है तो प्रदेश सरकार के मंत्री और पार्टी के कद्दावर नेता राकेश शुक्ला ने चुनावी चौसर के बीच जनता के मन में "राम" के लिए कमल खिलाने और सामाजिक समरसता के साथ प्रचार का "अनूठा तरीका" तैयार किया है।
आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के गांवो में उनकी आध्यात्मिक सत्संग के साथ लोगों के साथ जीमने की न्योता पद्धति मतदाताओं के मनों में कमल के प्रति लगाव बढ़ा रही है। तो शहरी क्षेत्र विजयपुर में ठेले पर "चाय की चुस्कियां" चुनावी माहौल में चर्चा का विषय बनी हुई है।
मंत्री राकेश शुक्ला बीते 7 दिनों में चार दर्जन से ज्यादा आदिवासी गांवो में जनमानस के बीच "कमल की पैठ" बनाने में महती भूमिका अदा कर रहे हैं तो वही शहरी क्षेत्र के युवा तपके के बीच कमल को सिरमौर करके भाजपा के राम की जीत के लिए जी जान से जुटे हुए हैं।
विजयपुर कस्बे में "चाय की चुस्कियो" के बीच शिव से चर्चा की तो शिवकुमार यादव कहते हैं कि हम तो बाजार में गांव से खरीददारी करने आए थे। ऐसे में चाय के ठेले पर हम पहुंचे। तो हमें चाय की तलब पर चाय का आर्डर दिया। तभी पीछे से कंधे पर एक हाथ आता है और मीठी आवाज में स्वर गूंजता है "भैया चाय हमारे साथ भी पी लो"। हमने पलट कर देखा तो कुर्ते पजामे के ऊपर जैकेट पहने, भाजपा का गमछा डालें जिस व्यक्ति की आवाज थी। हमने उनसे पूछा आप क्यों चाय पिला रहे तो उन्होंने जवाब दिया हम आपके ही बीच के हैं, इसी इलाके के हैं। आप हमारे भाई हो, तो हमें आपके साथ चाय पीना है। हमसे भी रहा नहीं गया तो हम ने पूछ लिया आप कौन है? तो उन्होंने बड़ी सादगी के साथ जवाब दिया मैं राकेश शुक्ला हूं। सरकार में मंत्री हूं। मुझे लगा ही नहीं कि कोई मंत्री मुझे इस तरीके से चाय का निमंत्रण देगा। मुझे अच्छा लगा।
यादव यह भी बताते हैं कि चुनावी माहौल में तो प्रचार -प्रसार होता है। लोग आते हैं, जाते हैं लेकिन इतनी सादगी पूर्ण तरीके से मंत्री को जनता के बीच देखकर अच्छा लग रहा है। वोट तो हम किसको देंगे? यह तो गुप्त मतदान है। लेकिन मंत्री जी की बातों से हमें लगा कि हमारे बीच का कोई व्यक्ति ही हमारी पूछ परख सालों बाद कर रहा है।
: घर घर जा कर भाजपा का सदस्य बनाएं : रमेश दुबे
Sun, Sep 15, 2024
भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं ने अधिक से अधिक सदस्य बनाने जान झोंकी..
जाने हम आखिर क्यों जुड़े भाजपा से ...
भिंड - संवाददाता
राष्ट्र वादी पार्टी से जुड़े आम जन, भिंड
भारतीय जनता पार्टी के सदस्यता महा पर्व को अभियान के रूप में चला कर पार्टी का लक्ष्य पूरा करेंगे कार्यकर्ता, उक्त वक्तव्य कार्यकर्ताओं को संदेश देते हुए सदस्यता अभियान के संयोजक ,प्रदेश कार्यसमिति सदस्य डॉक्टर रमेश दुबे ने व्यक्त किए।
श्री दुबे ने कहा भारतीय जनता पार्टी राष्ट्र वादी ,जनहित कारी नीतियों का पालन करने बाली राजनेतिक पार्टी है जो की आज विश्व की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में जानी पहचानी जाती है ।रमेश दुबे ने कार्यकर्ता साथियों से कहा की जो भी कार्यकर्ता 100 सदस्य जोड़ेंगे वो ही पार्टी के सक्रिय सदस्य बनेंगे इस लिए हमे जो पार्टी से लक्ष्य मिला है उसे समय सीमा में पूर्ण करेंगे। श्री दुबे ने कहा की प्रति दिन पार्टी का वरिष्ठ नेतृत्व जानकारी ले रहे है और आपकी प्रगति देख रहे हैं आप सभी हर बूथ पर घर घर जा कर पार्टी सदस्य बना कर अपना दाहित्व पूर्ण करें।
इसलिए जुड़े भाजपा से...
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सिद्धांतों और आदर्शों पर आधारित राजनीतिक दल है। यह किसी परिवार, जाति या वर्ग विशेष की पार्टी नहीं है। भाजपा कार्यकर्ताओं को जोड़ने वाला सूत्र है--भारत के सांस्कृतिक मूल्य, हमारी निष्ठाएं और भारत के परम वैभव को प्राप्त करने का संकल्प; और साथ ही यह आत्मविश्वास कि अपने पुरुषार्थ से हम इन्हें प्राप्त करेंगे।
भाजपा की विचारधारा को एक पंक्ति में कहना हो तो वह है ‘भारत माता की जय’। भारत का अर्थ है ‘अपना देश’। देश जो हिमालय से कन्याकुमारी तक फैला है और जिसे प्रकृति ने एक अखंड भूभाग के रूप में हमें दिया है। यह हमारी माता है और हम सभी भारतवासी उसकी संतान हैं। एक मां की संतान होने के नाते सभी भारतवासी सहोदर यानि भाई-बहन हैं। भारत माता कहने से एक भूमि और एक जन के साथ हमारी एक संस्कृति का भी ध्यान बना रहता है। इस माता की जय में हमारा संकल्प घोषित होता है और परम वैभव में है मां की सभी संतानों का सुख और अपनी संस्कृति के आधार पर विश्व में शांति व सौख्य की स्थापना। यही है ‘भारत माता की जय’।
भाजपा के संविधान की धारा 3 के अनुसार एकात्म मानववाद हमारा मूल दर्शन है। यह दर्शन हमें मनुष्य के शरीर, मन, बृद्धि और आत्मा का एकात्म यानि समग्र विचार करना सिखाता है। यह दर्शन मनुष्य और समाज के बीच कोई संघर्ष नहीं देखता, बल्कि मनुष्य के स्वाभाविक विकास-क्रम और उसकी चेतना के विस्तार से परिवार, गाँव, राज्य, देश और सृष्टि तक उसकी पूर्णता देखता है। यह दर्शन प्रकृति और मनुष्य में मां का संबंध देखता है, जिसमें प्रकृति को स्वस्थ बनाए रखते हुए अपनी आवश्यकता की चीज़ों का दोहन किया जाता है।
भाजपा के संविधान की धारा 4 में पांच निष्ठाएं वर्णित हैं। एकात्म मानववाद और ये पांचों निष्ठाएं हमारे वैचारिक अधिष्ठान का पूरा ताना-बना बुनती हैं।
(1) राष्ट्रवाद और राष्ट्रीय एकात्मता: हमारा मानना है कि भारत राष्ट्रों का समूह नहीं है, नवोदित राष्ट्र भी नहीं है, बल्कि यह सनातन राष्ट्र है। हिमालय से कन्याकुमारी तक प्रकृति द्वारा निर्धारित यह देश है। इस देश-भूमि को देशवासी माता मानते हैं । उनकी इस भावना का आधार प्राचीन संस्कृति और उससे मिले जीवनमूल्य हैं। हम इस विशाल देश की विविधता से परिचित हैं। विविधता इस देश की शोभा है और इन सबके बीच एक व्यापक एकात्मता है। यही विविधता और एकात्मता भारत की विशेषता है। हमारा राष्ट्रवाद सांस्कृतिक है केवल भौगोलिक नहीं। इसीलिए भारत भू-मंडल में अनेक राज्य रहे, पर संस्कृति ने राष्ट्र को बांधकर रखा, एकात्म रखा।
(2) लोकतंत्र: विश्व की प्राचीनतम ज्ञात पुस्तक ऋग्वेद का एक मंत्र ‘एकं सद विप्राः बहुधा वदन्ति उल्लेखनीय है। इसका अर्थ है, सत्य एक ही है। विद्वान इसे अलग-अलग तरीके से व्यक्त करते हैं। भारत के स्वभाव में यह बात आ गई है कि किसी एक के पास सच नहीं है। मैं जो कह रहा हूं वह भी सही है, आप जो कह रहे हैं वह भी सही है। विचार स्वातंत्र्य (फ्रीडम ऑफ थॉट्स एंड एक्सप्रेशन) का आधार यह मंत्र है।
संस्कृत में एक और मंत्र है- ‘वादे वादे जयते तत्त्व बोध:’ । इसका अर्थ है चर्चा से हम ठीक तत्त्व तक पहुँच जाते हैं। चर्चा से सत्य तक पहुंचने का यह मंत्र भारत में लोकतंत्रीय स्वभाव बनाता है। इन दोनों मन्त्रों ने भारत में लोकतंत्र का स्वरूप गढा-निखारा है। भारतीय समाज ने इसी लोकतंत्र का स्वभाव ग्रहण किया है। लोकतंत्र भारतीय समाज के अनुरूप व्यवस्था है।
भाजपा ने अपने दल के अंदर भी लोकतंत्रीय व्यवस्था को मजबूती से अपनाया है। भाजपा संभवतः अकेला ऐसा राजनीतिक दल है, जो हर तीसरे साल स्थानीय समिति से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष तक के नियमित चुनाव कराता है। यही वजह है कि चाय बेचने वाला युवक देश का प्रधानमंत्री बना है और इसी तरह सभी प्रतिभावान लोगों का पार्टी के अलग-अलग स्तरों से लेकर चोटी तक पहुंचना संभव होता रहा है।
सत्ता का किसी एक जगह केन्द्रित होना लोकतंत्रीय स्वभाव के विपरीत है। इसीलिए लोकतंत्र विकेन्द्रित शासन व्यवस्था है। केन्द्र, राज्य, नगरपालिका और पंचायत सभी के काम और ज़िम्मेदारियां बंटी हुई हैं। सब को अपनी-अपनी जिम्मेदारियां भारत के संविधान से प्राप्त होती हैं। संविधान द्वारा मिली अपनी-अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए सभी (केंद्र, राज्य, नगरपालिका और पंचायत) स्वतंत्र हैं। इसीलिए गांव के लोग पंचायत द्वारा गांव का शासन स्वयं चलाते हैं । और यही इनके चढ़ते हुए क्रम तक होता है।
लोकतंत्र के प्रति हमारी निष्ठा आपातकाल में जगजाहिर हुई। 25 जून, 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने भारत में आपातकाल घोषित कर दिया था। नागरिकों के प्रकृति-प्रदत्त मौलिक अधिकार भी निरस्त कर दिए गए थे। यहां तक कि जीवन का अधिकार भी छीन लिया गया था। तत्कालीन जनसंघ (अब भाजपा) नेताओं को जेलों में डाल दिया गया था और पार्टी दफ्तरों पर सरकारी ताले डाल दिए गए थे। अखबारों पर भी सेंसरशिप लागू हो गई थी।
लोकतंत्र के प्रति अपनी निष्ठा के कारण ही हम (यानि तत्कालीन जनसंघ के कार्यकर्ता) भूमिगत अहिंसक आंदोलन खड़ा कर सके। समाज को संगठित करके एक बड़ा संघर्ष किया। असंख्य कार्यकर्ताओं ने पुलिस का दमन, जेल यातना और काम धंधे (रोजी-रोटी) का नुकसान सहा। इसी संघर्ष का परिणाम था 1977 के आम चुनावों में जनता जनार्दन की शक्ति सामने आई और इंदिरा जी की तानाशाह सरकार धराशाई हो गई।
(3) सामाजिक व आर्थिक विषयों पर गांधीवादी दृष्टिकोण; जिससे शोषणमुक्त और समतायुक्त समाज की स्थापना हो सके: गांधीवादी सामाजिक दृष्टिकोण भेदभाव और शोषण से मुक्त समतामूलक समाज की स्थापना है। दुर्भाग्य से एक समय में, जन्म के आधार पर छोटे या बड़े का निर्धारण होने लगा, अर्थात् जाति व्यवस्था विषैली होकर छुआछूत तक पहुंच गई। भक्ति काल के पुरोधाओं से लेकर महात्मा गांधी व डॉ अम्बेडकर को इससे समाज को मुक्त कराने के लिए संघर्ष करना पड़ा। आज भी यह विषमता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
यही वजह है कि अनुसूचित जाति के साथ अनेक प्रकार से भेदभाव होते हैं और उन्हें यह अहसास कराया जाता है कि वे बाकी जातियों से कमतर हैं। शिक्षित और धनवान हो जाने से भी यह विषमता दूर नहीं होती। भारतीय संविधान के रचयिता डॉ अम्बेडकर ने विदेश से पीएचडी कर ली थी। फिर भी वह जिस कॉलेज में पढ़ाते थे वहां उनके पीने के पानी का घड़ा अलग रखा जाता था। भाजपा इसे स्वीकार नहीं करती। हम मानते हैं कि सभी में एक ही ईश्वर समान रूप से विराजता है। मनुष्य मात्र की समानता और गरिमा का यह दार्शनिक आधार है। देश को सामाजिक शोषण से मुक्त कराकर समरस समाज बनाना हमारी आधारभूत निष्ठा है।
किसी एक राज्य या कुछ व्यक्तियों के हाथ में सत्ता के केन्द्रीकरण के अपने खतरे होते हैं और यह स्थिति सत्ता में भ्रष्टाचार को बढ़ाती है। लेकिन गांधीजी की मांग सही साधनों पर भरोसा करने की भी थी। उन्होंने किसी ‘वाद’ को जन्म नहीं दिया, बल्कि उनके दृष्टिकोण जीवन के प्रति एकात्म प्रयास को उजागर करते हैं।
महात्मा गांधी के दृष्टिकोण के आधार पर भाजपा भी आर्थिक शोषण के खिलाफ है और साधनों के समुचित बंटवारे की पक्षधर है। हम इस बात पर विश्वास नहीं रखते कि कमाने वाला ही खाएगा। हमारी दृष्टि में कमा सकने वाला कमाएगा और जो जन्मा है वह खाएगा। हमारा मानना है कि समाज और राज्य सबकी चिन्ता करेंगे। दीनदयालजी मनुष्य की मूल आवश्यकताओं में रोटी, कपड़ा और मकान के साथ शिक्षा और रोज़गार को भी जोड़ते थे। आर्थिक विषमताओं की बढ़ती खाई को पाटा जाना चाहिए। अशिक्षा, कुपोषण और बेरोज़गारी से एक बड़ा युद्ध लड़कर ‘‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’’ का आदर्श प्राप्त करना हमारी मौलिक निष्ठा है। हमारे गांधीवादी दृष्टिकोण ने यह सिखाया है कि इसके लिए हमें विचार या तंत्र बाहर से आयात करने की ज़रूरत नहीं है। अपने सांस्कृतिक मूल्यों के आधार पर अपनी बुद्धि, प्रतिभा और पुरुषार्थ से हम इसे पा सकते हैं।
(4) सकारात्मक पंथ-निरपेक्षता एवं सर्वपंथसमभाव: एक समय पश्चिमी देशों में पोप और पादरियों का राजकाज में अत्यधिक नियंत्रण हो गया था। अगर कोई अपराध करता था तो चर्च में एक निर्धारित राशि का भुगतान करके वह अपराधमुक्त होने का प्रमाण पत्र ले सकता था। नतीजा यह हुआ कि शासन में धर्म के असहनीय हस्तक्षेप का विरोध शुरू हो गया। विरोधियों का तर्क था कि धर्म घर के अंदर की वस्तु है। इस विरोध आन्दोलन से धर्मनिरपेक्षता का प्रादुर्भाव हुआ।
भारत में धर्म किसी पुस्तक, पैगम्बर या पूजा पद्धति में निहित नहीं है। हमारे यहाँ धर्म का अर्थ है जीवन शैली। अग्नि का धर्म है दाह करना और जल का धर्म है शीतलता। राजा को कैसे रहना और व्यवहार करना है यह है उसका राज-धर्म, पिता की क्या ज़िम्मेदारियां हैं, उसे क्या करना चाहिए, यह है पितृ-धर्म। इसी तरह पुत्र-धर्म और पत्नी-धर्म हैं। इसीलिए भारत में धर्मनिरपेक्षता का अर्थ धर्म से निरपेक्ष हो जाना नहीं है।
भारत में धर्मनिरपेक्षता का अर्थ सर्व पंथ समादर भाव है। शासक किसी पंथ को, किसी भी पूजा पद्धति को राज-पंथ, राज-धर्म या राज-पद्धति नहीं मानेगा। वह सभी धर्मों, पंथों एवं पद्यतियों को समान आदर देता है। हमारा उद्देश्य है, न्याय सबके लिए और तुष्टिकरण किसी का नहीं। इसका व्यावहारिक अर्थ है ‘सबका साथ सबका विकास’। हमारे प्रधानमंत्री जी ने कहा है कि हिन्दओं को मुसलमानों से और मुसलमानों को हिन्दुओं से नहीं लड़ना है, बल्कि दोनों को मिल कर गरीबी से लड़ना है।
(5) मूल्य आधारित राजनीति: भाजपा ने जो पाचंवा अधिष्ठान अपनाया है वह है ‘मूल्य आधारित राजनीति’। एकात्म मानववाद मूल्य आधारित राजनीति पर विश्वास करता है। नियमों और मूल्यों के निर्धारण के वायदे के बिना राजनीतिक गतिविधि सिर्फ निज स्वार्थपूर्ति का खेल है। भाजपा ‘मूल्य आधारित राजनीति’ के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है और इस तरह सार्वजनिक जीवन का शुद्धिकरण एवं नैतिक मूल्यों की पुन:स्थापना उसका लक्ष्य है।
आज देश का संकट मूल रूप से नैतिक संकट है और राजनीति विशुद्ध रूप से ताकत का खेल बन गई है। यही वजह है कि देश नैतिक ताकत के लुप्तिकरण से जूझ रहा है और मुश्किलों का सामना करने की अपनी क्षमता को खोता जा रहा है। जब हम इन पांचों निष्ठाओं की बात करते हैं तो अपने आसपास या देश में घटे कुछ ऐसे प्रसंग ध्यान में आते हैं, जिनसे लगता है कि हम हर स्तर पर पूरी तरह सभी निष्ठाओं का पालन करते हैं, यह नहीं कहा जा सकता। पर, हम यह विश्वास से कह सकते हैं कि ये निष्ठाएं हमारे लिए प्रकाश-स्तम्भ की तरह हैं। हम सबको यह प्रयत्न करते रहना ज़रूरी है कि हम अपना जीवन और अपनी पार्टी को इन निष्ठाओं के आधार पर चलाएं।