: ”जय गुरुदेव त मिले मुरारी”... : राजिंदर सिंह
Admin Thu, Apr 10, 2025

संत राजिन्दर सिंह महाराज के भिण्ड में सत्संग व नामदान
के कार्यक्रम में हजारों की संख्या में लोग एकत्रित हुए
परम पूजनीय संत राजिन्दर सिंह महाराज की एक दिवसीय यात्रा का भिंड में महत्त्वपूर्ण आध्यात्मिक अवसर रहा
गणेश भारद्वाज - भिण्ड
सावन कृपाल रूहानी मिशन के अध्यक्ष संत राजिन्दर सिंह महाराज के सत्संग प्रवचन के दौरान 10 अप्रैल, 2025 बृहस्पतिवार को भिण्ड के मेला ग्राऊंड के सामने स्थित मेडिकल कॉलेज ग्राऊंड में हजारों की संख्या में लोग एकत्रित हुए। परम पूजनीय संत राजिन्दर सिंह जी महाराज की एक दिवसीय यात्रा का यह महत्त्वपूर्ण आध्यात्मिक अवसर था।
परम पूजनीय संत राजिन्दर सिंह जी महाराज के सत्संग से पूर्व पूजनीय माता रीटा जी ने संत नामदेव जी महाराज की वाणी से एक शब्द ”जय गुरुदेव त मिले मुरारी” (गुरु की कृपा से ही हम पिता-परमेश्वर का अनुभव कर सकते हैं) के गायन से हुई, जिसने उपस्थित संगत को मंत्रमुग्ध कर दिया।
भिण्ड भाजपा के विधायक नरेन्द्र सिंह कुशवाह ने संत राजिन्दर सिंह महाराज का भिण्ड पधारने पर फूलों का गुलदस्ता देकर स्वागत कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया।
परम पूजनीय संत राजिन्दर सिंह महाराज ने अपने सत्संग में गुरु की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि किस प्रकार एक पूर्ण आध्यात्मिक गुरु के चरण-कमलों में पहुँचकर तथा उनसे आध्यात्मिक दीक्षा प्राप्त करके हम सांसारिक जीवन की चुनौतियों पर विजय पाकर अपने जीवन के मुख्य उद्देश्य प्रभु-प्राप्ति को प्राप्त कर सकते हैं।
परम पूजनीय संत राजिन्दर सिंह महाराज ने संत नामदेव जी महाराज के शब्द की व्याख्या करते हुए एक पूर्ण आध्यात्मिक गुरु की खोज करने पर जोर दिया क्योंकि वे ही हमारी आंतरिक और बाहरी दुनिया दोनों में हमारे मार्गदर्शक और रक्षक होते हैं। इंसान होने के नाते अक्सर हम अपने जीवन में तनाव और चिंता का सामना करते हैं, इस करके हम शांति और आनंद की तलाश में रहते हैं। हम अपना ध्यान पिता-परमेश्वर की ओर करते हैं और उन्हें बाहरी दुनिया में खोजते हुए संतुष्टि पाने की कोशिश करते हैं। लेकिन हम हमेशा इस बात से अंजान रहते हैं कि पिता-परमेश्वर कहीं बाहर नहीं बल्कि हमारे भीतर हैं। केवल एक पूर्ण गुरु की शरण में जाकर ही हमें इस सच्चाई का पता लगता है।
उन्होंने आगे समझाया कि जब हम किसी पूर्ण गुरु से आध्यात्मिक दीक्षा का उपहार प्राप्त करते हैं तो हमें अपने अंतर में प्रभु के दिव्य-प्रेम और प्रकाश का अनुभव होता है। एक पूर्ण गुरु की कृपा और मार्गदर्शन से हम आत्मिक रूप में अपने सच्चे स्वरूप को जान पाते हैं। एक पूर्ण गुरु ही हमें अपने जीवन के मुख्य उद्देश्य को समझने में मदद करते हैं और हमें याद दिलाते हैं कि हमारी आत्मा पिता-परमेश्वर से बिछड़ी हुई है। वे हमें ध्यान-अभ्यास की विधि सिखाकर आंतरिक आध्यात्मिक यात्रा पर निकलने में हमारी मदद करते हैं ताकि हम यह अनुभव कर सकें कि मनुश्य जीवन ही हमारी आत्मा के लिए अपने सच्चे घर लौटने का एक दुर्लभ अवसर है। एक पूर्ण गुरु से ही हम सांसारिक मोह पर काबू पाने, डर और संदेह से ऊपर उठने और जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होने के लिए ताकत प्रदान करते हैं।
अपने सत्सग के अंत में परम पूजनीय संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने कहा कि यदि हमें अपने जीवन के सर्वोच्च उद्देश्य को पूरा करना है तो यह जरूरी है कि हम एक पूर्ण आध्यात्मिक गुरु की शरण में जाएं और उनसे मार्गदर्शन प्राप्त करें।
सत्संग के उपरांत परम पूजनीय संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने सैकड़ों की संख्या में लोगों को नामदान (आध्यात्मिक दीक्षा) की अनमोल व दुर्लभ दात से नवाज़ा।




सत्संग सभा में रक्तदान शिविर का आयोजन
विशाल सत्संग सभा के दौरान सावन कृपाल रूहानी मिशन की भिण्ड शाखा की ओर से रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें कई भाई-बहनों ने स्वेच्छा से रक्तदान किया। इसके साथ ही साथ मुफ्त वस्त्र-वितरण शिविर में जरूरतमंद भाई-बहनों को वस्त्र, पुस्तकें और जूते आदि का वितरण किया गया।
शांति, प्रेम और मानव एकता का संदेश फैलाने आए श्री महाराज
संत राजिन्दर सिंह महाराज को ध्यान-अभ्यास के माध्यम से आंतरिक और बाहरी शांति को बढ़ावा देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है। वे विश्व-विख्यात ध्यान-अभ्यास के गुरु, ध्यान-अभ्यास पर सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तकों के लेखक हैं, उनको पिछले 35 वर्षों से शांति, प्रेम और मानव एकता का संदेश फैलाने के लिए संपूर्ण विश्वभर में जाना जाता है।
विश्वभर में 3200 से अधिक केन्द्र
सावन कृपाल रूहानी मिशन के आज संपूर्ण विश्वभर में 3200 से अधिक केन्द्र स्थापित हैं। मिशन का भारतीय मुख्यालय विजय नगर, दिल्ली में है तथा अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय नेपरविले, शिकागो, अमेरिका में स्थित है।
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