: दो रिश्तेदार चला रहे थे एक ही नंबर की तो स्विफ्ट कार, पुलिस ने पकड़े
एक ही नम्बर DL1JC 4879 पर संचालित दो स्विफ्ट कारों को पकड़ा जाकर. दो आरोपियों के विरूद्ध मामला दर्ज किया गया
भिण्ड - गणेश भारद्वाज
पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र सिंह चौहान व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमलेश कुमार एवं इंचार्ज नगर पुलिस अधीक्षक अरविन्द शाह के निर्देशन में थाना प्रभारी देहात प्रभारी रामबाबू सिंह यादव के नेतृत्व व यातायात पुलिस की सूचना पर से दिनांक 30 अप्रैल की शाम को पातीराम शिवहरे पेट्रोल पम्प पर से दो स्विफ्ट कार एक ही नम्बर DL1ZC 4879 को सीएनजी गैस भरवाते समय पकडा जाकर धोखाधडी का अपराध पंजीबद्ध किया गया है तथा दोनों कारों को हिरासत में लिया गया है।
यातायात थाने में पदस्थ एसआई गौरीशंकर यादव मय फोर्स के शहर यातायात व्यवस्था देख रहे थे तभी जरिये मुखबिर सूचना मिली कि पातीराम शिवहरे पेट्रोल पम्प पर दो स्विफ्ट कारें एक ही नम्बर की है जिनका नम्बर DL1ZC 4879 है जो सीएनजी गैस भराने के लिये खडी है। सूचना पर से गौरीशंकर यादव मय फोर्स के पेट्रोल पम्प पर पहुंच कर दोनों कारों के चालकों से पूछताछ कर थाना देहात को सुपुर्द कर दी।
उक्त दोनों कारों के चालकों से देहात थाना प्रभारी रामबाबू सिंह यादव द्वारा बारीकी से पूछताछ की गयी तो पहले दोनों कार चालक अपनी-अपनी कार बताते रहे बाद में जब दोनों कार चालकों के दस्तावेज चेक किये गये व ऑनलाईन सर्च किये गये तो पाया गया कि वाहन नम्बर DL1ZC. 4879 का मालिक एक ही नम्बर पर दो कारों को चलवा रहा था। बाद आरोपीगणों के विरूद्ध धारा 420, 481, 482, 473 भादवि का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। आरोपीगणों से उक्त तरह के कृत्य के सम्बन्ध में पूछताछ की जा रही है।इस कार्यवाही में थाना प्रभारी देहात रामबाबू सिंह यादव, उनि विजय शिवहरे, उनि कौशलेन्द्र सिंह गुर्जर, उनि रविन्द्र सिंह सेंगर, सउनि गौरीशंकर यादव आर दीपक पाण्डेय, अविनाश शर्मा की अहम भूमिका रही ।
आरटीओ और पुलिस को धोखा दे रहे हैं कई गाड़ियों के संचालक
जिले में परिवहन करने वाले कई ट्रक, डंपर,कार, ट्रैक्टर के संचालक अपने वाहन के नंबरों में हेराफेरी करके जिला परिवहन विभाग और पुलिस को धोखा देने में लगे हुए हैं । अगर इन वाहनों के नंबरों की सघनता से जांच की जाए तो कई बड़े मामले उजागर हो सकते हैं । यह एक ही नंबर से गाड़ियों को संचालित कर परिवहन विभाग को टैक्स देने में चूना लगाते हैं । इसके अलावा जब गाड़ियों की चेकिंग होती है तो उससे भी यह एक ही नंबर होने की वजह से बच जाते हैं ।यही नहीं अवैध रेत व पत्थर का परिवहन करने वाले बड़े वाहन बिना नंबरों के भी गुजरते हुए जिले की सड़कों पर देखे गए हैं ।जिनकी कोई रोका टोकी कभी नहीं करता है। अब इसके पीछे क्या कारण है यह तो परिवहन विभाग से जुड़े हुए अधिकारी बना सकते हैं लेकिन जिले में गाड़ियों के नंबरों को लेकर घालमेल बड़े पैमाने पर चल रहा है जिसमें विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत का होना भी संभव माना जा सकता है। क्योंकि यह वाहन धड़ल्ले से जिले की सड़कों पर चल रहे हैं और इन पर कोई कार्रवाई कभी नहीं होती है। जिला परिवहन विभाग और पुलिस को मिलकर एक संयुक्त अभियान चलाकर इस तरह का गोरख धंधा करने वाले वाहनों के संचालकों पर कठोर कार्रवाई करना चाहिए जिससे कि शासन को टैक्स का चूना न लगाया जा सके।

जब घटना होती है तब जागता है जिला प्रशासन
जिले में जब इन वाहनों से कोई घटना होती है तब परिवहन विभाग और जिला प्रशासन जागता है और दिखावे की कुछ कार्रवाई करता है लेकिन तब तक या तो किसी की जान जा चुकी होती है या शासन को बड़ा चूना लगाया जा चुका होता है।
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