: कमलनाथ ने दिया इस्तीफा, डॉ गोविंद सिंह बने नेता प्रतिपक्ष

भोपाल मे गोविंद सिंह ने दी प्रथम प्रतिक्रिया बोले कमलनाथ जी ने किया है कार्य विभाजन,, विपक्ष की आवाज बुलंद करता था अब भी करूंगा

गणेश भारद्वाज - भिण्ड

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के द्वारा नेता प्रतिपक्ष के पद से इस्तीफा दिए जाने के बाद उनका इस्तीफा कांग्रेस हाईकमान के द्वारा मंजूर कर लिया गया है और उसके बाद में अंचल के प्रमुख कांग्रेस नेता डॉक्टर गोविंद सिंह को नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस जिम्मेदारी के मिलने के बाद लहार से लेकर संपूर्ण भिंड जिले और चंबल ग्वालियर अंचल में खुशी की लहर दौड़ गई है। कांग्रेस के कार्यकर्ता और जो डॉ गोविंद सिंह के समर्थक चारों तरफ मिठाई बांट रहे हैं और खुशियां मना रहे हैं। हालांकि डॉ गोविंद सिंह ने भोपाल में दिए बयान में कहा है कि कोई सुर्खाब के पंख नहीं लग गए हैं यह जिम्मेदारी विपक्ष कि मैं पहले भी निभाता था और अब भी निभाता रहूंगा। कमलनाथ जी ने यह कार्य विभाजन किया है जिसमें मुझे नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी है।

गोविंद सिंह का जन्म 1 जुलाई 1951 को लहार के एक छोटे से गांव वैसपूरा में हुआ। 1995 से लेकर अब तक कोई चुनाव नहीं हारा। लगातार 7 बार विधायक बने। लहार के अजेय विधायक है। पहला चुनाव जनतादल से और फिर सब चुनाव कांग्रेस के टिकट पर जीते। प्रदेश में दिगविजय सरकारों व दिसंबर 2018 और मार्च 2020 के बीच मुख्यमंत्री कमलनाथ के अधीन मध्य प्रदेश सरकार में सहकारिता, संसदीय कार्य और सामान्य प्रशासन मंत्री पद पर रहे। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खेमे के नेता माने जाते हैं डॉक्टर गोविंद सिंह। 2014 में मुरैना से लोकसभा का चुनाव लड़ा था जो भाजपा नेता अनूप मिश्रा से हार गए थे। मीडिया से सीधी सटीक बात करने मैं माहिर माने जाते हैं डॉक्टर गोविंद सिंह। जमीन से जुड़े हुए नेता हैं और आज भी खेती ही उनका मुख्य व्यवसाय है। हमेशा सामंतवाद के खिलाफ रहे इसी वजह से कांग्रेस में रहते हुए भी वे अंचल के प्रमुख नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के विरोधी बने रहे। हालांकि अब ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में है तो गोविंद सिंह उनके खिलाफ सीधे बोलते हैं।

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