: नदियों के मरते ही हमारी सभ्यता भी मर जाएगी : नितिन दीक्षित
Admin Fri, Mar 15, 2024

नदी दिवस पर एक शिक्षक ने पर्यावरण की रक्षा के लिए नदियां बचाने की गुहार लगाई
https://youtu.be/PwHa2NfuJY8?si=W2gF6WNelMd4JqTfनितिन दीक्षितभिंड - संवाददाता
भारत सहित दुनिया के सभी देशों में जितने भी सभ्यताएं जन्मी है, वह सब नदियों के किनारे ही जन्मी है। आज नदिया अपने अस्तित्व के संकट से गुजर रही है, ऐसे में कई नदियां अपना अस्तित्व खो चुकी है और कई खोने की कगार पर है । अगर नदियां नहीं रहेगी तो समूची मानव सभ्यता भी नहीं रहेगी। उक्त उद्गार समाज सेवी और शिक्षक नितिन दीक्षित ने ग्राम डिडी में कुंवारी नदी के किनारे व्यक्त किये।
सामाजिक संस्था सुप्रयास द्वारा "नदी दुर्दशा दर्शन यात्रा" का आयोजन किया गया था। ज्ञात रहे 14 मार्च को नदियों के लिए अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई दिवस मनाया जाता है इस वर्ष की थीम "जल सभी के लिए" है।
सुप्रयास के सचिव और वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट डॉ मनोज जैन ने कहा कि नदियों पर जितना हक मनुष्य का है उतना ही हक उसे पर आश्रित प्रत्येक जीव का है चाहे वह कछुआ हो मछली हो या जलीय घास ही क्यों ना हो? नदियों के संरक्षण पुनर्स्थापना और सतत प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय स्तर पर लोगों को जागरूक करना प्रमुख उद्देश्य है इसलिए हमने नदी दुर्दशा दर्शन यात्रा का आयोजन किया है जिससे लोगों को नदियों की वर्तमान स्थिति के बारे में पता लग सके। इसके अलावा सुप्रयास भिंड ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की है कि सभी विद्यालयों एवं महाविद्यालय में नदियों एवं पर्यावरण से संबंधित कार्यक्रमों को क्लास रूम में आयोजित ना करके फील्ड में आयोजित करने की कार्य योजना बनाई जाए। जिससे आने वाली पीढ़ी नदियों के महत्व को समझें और हैबिटेट के नुकसान को रोकने के लिए एकजुट हो सके। प्राकृतिक संसाधनों के सूझबूझ से उपयोग करके ही हम अपने प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित कर सकेंगे। इस अवसर पर विक्रांत दीक्षित, सचिन यादव ग्राम जवाहरपुरा, जय शर्मा, शिवम यादव मंगलम यादव सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
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