: भिण्ड विधायक का पांचवां शिक्षक सम्मान समारोह 5 सितम्बर को..
Admin Sun, Sep 4, 2022
संस्कृति गार्डन में भाजपा विधायक संजीव सिंह कुशवाह ने रखी विधानसभा के विकास की रूप रेखा, सिचाई विभाग की जमीन व पुरानी जेल पर बनेगा ब्रह्द कांप्लेक्स
कलेक्ट्रेट , एसपी ऑफिस व न्यायाल परिसर नगर के बाहर बनाने की तैयारी
गणेश भारद्वाज - भिंड
प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी भिंड विधायक संजीव सिंह कुशवाहा के द्वारा पांचवा शिक्षक सम्मान समारोह 05 सितम्बर 2022, सोमवार को हम 3000 शिक्षकों का सम्मान-समारोह संस्कृति मैरिज गार्डन, बायपास रोड भिण्ड में करने जा रहे है। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती संध्या राय सांसद भिण्ड- दतिया लोकसभा,मुख्य अतिथि डॉ.अरविंदसिंह भदौरिया, सहकारिता एवं लोकसेवा प्रबंधन, विशिष्ट अतिथि श्री ओ. पी. एस. भदौरिया, राज्यमंत्री नगरीय विकास एवं आवास, डॉ.रामलखनसिंह,पूर्व सांसद, श्री नाथूसिंह गुर्जर जिलाध्यक्ष भाजपा, श्रीमती कामना सुनीलसिंह अध्यक्ष, जिला पंचायत भिण्ड, श्रीमती वर्षा-अमित बाल्मीकी, अध्यक्ष नगर पालिका, राजकुमारसिंह कुशवाह, उपाध्यक्ष खाद एवं बीज निगम, धीरसिंह भदौरिया महामंत्री भाजपा, श्रीमती सरोज बघेल अध्यक्ष, जनपद पंचायत भिण्ड रहेगें। प्राचीनकाल से ही गुरूओं का हमारे समाज में सर्वोच्च स्थान है उसी परंपरा को साकार रूप देने के लिए हमने यह कार्यक्रम 2018 से प्रारंभ कर आजीवन करने का संकल्प लिया है। हम अपने द्वितीय राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस को शिक्षक दिवस के रूप में मनाकर राष्ट्र के निर्माण में उनके योगदान को याद करते है, तथा गुरूओं के प्रति अतुलनीय सम्मान के भाव को जाग्रत बनाये रखने के लिए यह कार्यक्रम निरंतर आयोजित करते आ रहे है। शिक्षक राष्ट्रनिर्माता होता है किसी देश की भावी पीढ़ी कैसी होगी, इसका संपूर्ण दायित्व हमारे शिक्षक समाज पर ही होता है, किसी भी देश के उत्थान एवं पतन में शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, हमारे शिक्षकों द्वारा बालकों में नैतिक संस्कार दिये जाते है, जो शिक्षक पूरे वर्ष संपूर्ण मनोयोग से बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य करते है तो हमारा भी दायित्व बन जाता है कि वर्ष में एक दिन 5 सितम्बर को हम सभी उन्हें सम्मानित कर उनके योगदान को अविस्मरणीय बनायें। जब हम शिक्षकों का सम्मान करते है तो वह निश्चित रूप से दोगुने उत्साह के साथ अपने दायित्व का पूर्ण ईमानदारी एवं सत्य निष्ठा के साथ निर्वाहन करते है। हमारे देश में प्राचीनकाल से ही गुरू-शिष्य परंपरा चली आ रही है जिसमें गुरूओं को ईश्वर से भी श्रेष्ठ माना गया है। देश को नई गति, नई दिशा एवं नई लय देने के लिए एक उत्कृष्ट शिक्षक का होना जरूरी है, जो हमारे बच्चों में नई ऊर्जा का संचार कर सकें।
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