: भगवान,भक्त, भक्ति तीनों का बड़ा गहरा संबंध: प्रतीक सागर
Admin Mon, Jul 31, 2023
मुनि श्री प्रतीक सागर की अमृतवाणी में भक्तांबर प्रवचन माला का नेमीनाथ मंदिर में हुआ भव्य शुभारंभ
भिंड - संवाददाता
भगवान,भक्त, भक्ति तीनों का बड़ा गहरा संबंध है जब भक्त बनाकर भक्ति की जाती है तो चमत्कार होते हैं मगर जब याचक बनकर भक्ति की जाती है तो वह महज दीवारों से की गई बातें होती है। आचार्य मानतुंग ने धार जिले की जेल में बैठकर भगवान आदिनाथ की भक्ति की जो शब्द उनके द्वारा निकले उन्होंने भक्तांबर महाकाव्य का रूप ले लिया और एक-एक काव्य पर एक-एक ताला टूटा गया। जितने भी बड़े-बड़े कार्य हुए वह जेल के अंदर बैठकर हुए विनोबा भावे ने धूलिया जेल में गीता पर प्रवचन किया लोकमान्य तीलक ने बैंकेट जेल में गीता रहस्य पुस्तिका लिखी, महात्मा गांधी ने अपनी आत्मकथा जेल में बैठकर लिखी नारायण श्री कृष्ण का जन्म जेल में हुआ। भक्त जब चारों तरफ से संकट में गिर जाता है और दिल से भगवान की भक्ति करता है तो भगवान स्वयं जरूर आते हैं । क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज की अमृतवाणी में 31 जुलाई को नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर प्रांगण में भक्तांबर प्रवचन माला महोत्सव का प्रारंभ हुआ सर्वप्रथम रिद्धि मंत्रों के मंत्र बोलकर 48 अर्घ्य समर्पित किए गए। प्रिया जैन द्वारा मंगलाचरण किया गया, शास्त्र भेंट मंजू जैन , पाद प्रक्षालन आनंद बेकरी, चित्र अनावरण अनीता अनंत जैन, भक्तामर मंगल कलश की स्थापना मंजू जैन चंबल आंयलमिल द्वार की गई।
धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री ने आगे कहा कि भक्तांबर स्त्रोत किसी जाति या संप्रदाय का कल्याण करने के लिए नहीं है संपूर्ण मानव जाति के उद्धार के लिए है भक्तांबर की महिमा बुद्धि में जीने वाला व्यक्ति नहीं समझ सकता हृदय में जीने वाला व्यक्ति समझ सकता है जिसके हृदय में भगवान की भक्ति सच्चे रूप में जन्म लेती है। सच्चे रूप में भक्ति के जन्म होने पर परमात्मा तत्व की उपलब्धि के लिए इंतजार नहीं करना पड़ता है रास्ता स्वयं व स्वयं मिल जाता है धर्म के प्रति द्वेष भाव रखकर कार्य करने वाला कभी भी अपनी जिंदगी में मंजिल को प्राप्त नहीं कर सकता है। मीरा, साबरी, चंदन वाला वह नारी है जिनके मन में मां के प्रति भक्ति पैदा हुई तो उन्होंने दुनिया की परवाह नहीं की वह भक्ति के रस में डूब गई। पदार्थ को मीठा करने के लिए रस की जरूरत पड़ती है, रसगुल्ला, जलेबी, आम अनार इनमें अगर रास ना हो तो उन्हें कोई ग्रहण नहीं करता है इस प्रकार भक्ति के हृदय में भक्ति का रस ना हो तो परमात्मा कभी नहीं मिल सकता परमात्मा को पाने के लिए भक्ति के रस में डूबना जरूरी है।
विज्ञापन