: किसी को छोटा समझकर उसकी अवज्ञा न करें : नारायणानन्दतीर्थ महाराज

Admin Wed, Apr 10, 2024

भिंड - संवाददाता

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् श्री राम की कथा सरिता में अवगाहन करा रहे जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नारायणानन्दतीर्थ जी महाराज।श्री राम कथा के द्वतीय दिवस कथा का अक्षुण्ण प्रवाह बहा। रामायण में प्रसंग आया कि रावण, कुम्भकरन एवं विभूषण ने घनघोर तपस्या की। सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा ने तीनों की अत्यंत प्रशंसनीय तपस्या को देखकर आशीर्वाद देने की इच्छा प्रकट की,तब रावण ने साभिमान वशात् वर मांगते हुए कहा कि मैं प्रभु नर और बानर को कुछ नहीं समझता हूं अतः इनसे मुझे कोई हानी नहीं है।इनसे अतिरिक्त कोई दैवीय शक्ति अन्य मेरे संहार की अवश्यंभावी कारण न बने। चतुर्मुखी ब्रह्मा ने विचार करके आशीर्वाद दे दिया। कालान्तर में नर रूप में नारायण और बानर रूप धरे देवताओं ने सम्पूर्ण विनाश किया। स्वामी जी ने श्री राम जन्म की कथा को बढ़ाते हुए कहा कि राजा दशरथ के के कुलगुरु वशिष्ठ के निर्देशन से पुत्रेष्टि यज्ञ का सम्पादन श्रृंगीऋषि द्वारा हुआ।विद्वान् ब्राह्मणों द्वारा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ में वेद मन्त्रों द्वारा आहुतियां दी गई। भगवान् विष्णु यज्ञगत चारु में प्रविष्ट हो गये। अग्नि भगवान् ने यज्ञान्त में प्रगट होकर खीर चारू प्रदान किये और कहे कि जाओ इसी से तुम्हारी अभीप्सा पूर्ण होगी। रामायण मे गोस्वामी जी कहते हैं


अरध भाग कौसल्यहिं दीन्हा उभय भाग आधे कर लीन्हा।।
चारों अंशानुसार तीनों रानियों ने दिव्यता का आधान किया। साक्षात् भगवान् विष्णु ने दसरथ जी का पुत्र भाव स्वीकार किया।साथ ही ब्रह्मा जी ने सभी देवताओं को हरि की सेवा हेतु पृथ्वी लोक पर अवतरित होने का आदेश दिया।कथा के पूर्व मां अन्नपूर्णेश्वरी वेद अनुसंधान संस्थान के आचार्य एवं बटुको के द्वारा पूज्य गुरुदेव की पादुका पूजन संपादित की गई

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