: आए हैं तो काटेंगे एक रात तुम्हारी बस्ती में …दिनेश प्रभात
Admin Fri, Jun 23, 2023
इटावा से
कविकमलेश शर्मा की रिपोर्टविगत दिवस प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका "गीत गागर" के संपादक श्री दिनेश प्रभात के सम्मान में कवि कमलेश शर्मा के आवास पर एक शाम :दिनेश प्रभात के नाम काव्य गोष्ठी संपन्न हुई । जिसमें इटावा के कवि और साहित्यकार शामिल हुए तथा श्री दिनेश प्रभात एवं उनकी धर्म पत्नी नीता प्रभात का सम्मान किया गया ।
उल्लेखनीय है कि विगत दिवस श्री प्रभात जी सपत्नीक इटावा में कवि कमलेश शर्मा के मेहमान के रूप में पधारे । उक्त अवसर पर उनका सम्मान समारोह रखा गया । जिसमें प्रभात दंपत्ति को अंग वस्त्र भेंट कर उन्हें सम्मानित किया गया । उक्त अवसर पर प्रशस्ति स्टूडियो की ओर से कवि कुमार मनोज ने स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका सम्मान किया । श्री प्रभात के सम्मान में एक काव्य गोष्ठी भी संपन्न हुई जिसका संचालन कुमार मनोज ने किया । श्री दिनेश प्रभात ने अनेक मुक्तकों और गीतों को सुनाकर गोष्ठी को रसासिक्त कर दिया ।उन्होंने अपना बहुत प्रसिद्ध मुक्तक सुना कर अपने कविता पाठ का आगाज किया
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मुक्तक
आये हैं तो काटेंगे यह रात तुम्हारी बस्ती में
चाहोगे तो कर लेंगे दो बात तुम्हारी बस्ती में
मन के सूने आँगन में यदि आज घटा बन छाओगे
कर देंगे हम गीतों की बरसात तुम्हारी बस्ती में
_ दिनेश प्रभात
इसके साथ ही उन्होंने कई गीत सुनाए
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आप मिले तो लगा ज़िन्दगी, अपनी आज निहाल हुई
मन जैसे कश्मीर हुआ है,आँखें नैनीताल हुईं
_ दिनेश प्रभात
एक अन्य गीत सुनाते हुए उन्होंने कहा
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गीत
पाकर तुमको हुए हौसले, अपने आज बुलंद
प्यार तुम्हारा गीत का जैसे, एक रसीला छंद
_ दिनेश प्रभात
गोष्ठी का आरंभ प्रतीक्षा चौधरी की सरस्वती वंदना से हुआ । सरस्वती वंदना के साथ ही उन्होंने अपनी रचना सुनाई
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द्वार की देहरी मुस्काती सुरक्षित तुलसी आंगन की
सदा शरमाता पतझड़ भी देख हरियाली सावन की
जहां पर संस्कृति करती गर्व और रिश्तो का बसर होता
जहां बेटी खुश रहती है वो जन्नत जैसा घर होता
प्रतीक्षा चौधरी
इसके बाद उपस्थित लगभग एक दर्जन कवियों ने अपना रचनाओं का पाठ किया ।
वरिष्ठ साहित्यकार , तीन दर्जन से अधिक पुस्तकों के लेखक , हिंदी के विद्वान डॉ कुश चतुर्वेदी ने प्रभात जी का स्वागत करते हुए कविता के प्रति उनके समर्पण की भूरि भूरि प्रशंसा की और वर्तमान सामाजिक परिवर्तन को रेखांकित करते हुए एक कविता सुनाई जिसमे बच्चों की छुट्टियों का संदर्भ देते हुए सामाजिक परिवर्तन और व्यक्ति की बदली सोच पर अपनी रचनाएं पढ़ी इसके साथ ही उन्होंने वृद्धाश्रम पर अपनी एक रचना सुनाते हुए कहा _
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सोशल मीडिया भी सबको बनाती है संस्कारवान
विचारों का कैसा निर्मल प्रवाह
मातृ दिवस आया तो माताजी , पितृ दिवस पर पिताजी महान
मेरी छोटी सी समझ चक्कर खाती है।
यह बात समझ में नहीं आती है।।
जब इतने आज्ञाकारी संताने हम आप हैं ।
तो वृद्धाश्रमों में किसके मां बाप हैं ?।।
फेसबुक की दीवार पर हम जैसा लिखें
काश!काश!काश!यथार्थ में भी हम वैसे ही दिखें
……कुश चतुर्वेदी
गीता का काव्यानुवाद करने वाले वरिष्ठ कवि गोविंद माधव शुक्ला ने योग दर्शन पर अपनी कविताएं सुनते हुए वातावरण को आध्यात्मिक कर दिया
उन्होंने सुनाया _
ज्ञान, तप, सत्कर्म पथ से योग का पथ ज्येष्ठ है।
अस्तु अर्जुन योग कर, योगी ही सबसे श्रेष्ठ है।।
_ गोविंद माधव शुक्ला
प्रशस्ति स्टूडियो के निर्देश और प्रसिद्ध कवि और शायर कुमार मनोज ने अपने कई चर्चित शेर प्रस्तुत करते हुए शमां बांध दिया ।उन्होंने एक शेर पढ़ते हुए तालियां बटोरीं
लहू खामोश है होंठो पे ताला डाल रक्खा है!!
ये किस सांचे में ख़ुद को आदमी ने ढाल ने रक्खा है!!
रजनीश त्रिपाठी ने अपनी हास्य रचनाओं के साथ सामाजिक चेतना जागने हेतु एक सुंदर गीत भी सुनाया
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राह मुश्किल तो क्या, दूर मंजिल तो क्या, चाहा जो तुमने वो, हो न हासिल तो क्या, हौसला रखना इसका भी हल आएगा! वक़्त कैसा भी हो कल बदल जाएगा !!
_ रजनीश त्रिपाठी
लेपेटे में नेताजी फेम कवि अवनीश त्रिपाठी ने तात्कालिक विषय पर कई हास्य क्षणिकाएं प्रस्तुत करने के साथ साथ गीत भी सुनाया
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तोड़ कर लम्हे चुरायेंगे,जिंदगी हम गुनगुनायेंगे
जिंदगी चाहे तो रूठे जिंदगी चाहे तो रोये कुछ भी हो हम मुस्कुरायेंगे
प्रवीण कुशवाह ने सूफियाना गीत सुनाया
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जो बीत गया सो बीत गया
श्रंगार रस के प्रसिद्ध कवि शिवगोपाल अवस्थी ने विरह श्रंगार को गीत में पिरोते हुए प्रस्तुत किया
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घने मेघ आँखों में छाए हुए हैं कभी आँसुओं को न झरने दिया है,
_ शिवगोपाल अवस्थी
कवि सुनील अवस्थी ने देशभक्ति के गीतों को सुनाते हुए माहौल को ओज से भर दिया उन्होंने अपना गीत सुनाते हुए कहा
जब तक तन में प्राण शेष हैं वन्देमातरम गाऊंगा
_ सुनील अवस्थी
इसी के साथ समीक्षा चौधरी ने भी काव्य पाठ किया ।
गोष्ठी के मेजबान और राष्ट्रीय ख्यातिलब्ध कवि डॉ कमलेश शर्मा ने काव्य पाठ करते हुए अपनी चर्चित गांधी और कैकेई कविता सुनाई।
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भारत की है दुर्दशा आज , आदर्श स्वार्थ में सभी बहे
अच्छा है गांधी नहीं रहे
_ डॉ कमलेश शर्मा
मेजबान कमलेश शर्मा और संध्या शर्मा ने सभी रचनाकारों का स्वागत किया , इस अवसर पर गीतगागर पत्रिका का लोकार्पण भी किया गया ।
गोष्ठी में निरुपमा अवस्थी , रवि चौधरी , प्रियांक मिश्रा , शिवांगी शर्मा , आदित्य शर्मा , शिवानी शर्मा आदि भी उपस्थित रहे ।
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