: 14 माह के बालक का अपहरण, पुलिस की सक्रियता से 11 घंटे में मुक्त
Admin Thu, May 18, 2023
मौ थाना क्षेत्र के पड़रया गांव की घटना, रात भर छावनी बना रहा गांव, पुलिस अधीक्षक मनीष खत्री ने एसडीपी सौरभ कुमार व थाना प्रभारी उदयभान यादव सहित पांच इंस्पेक्टर और कई पुलिस जवानों के साथ सम्हाला मोर्चा
भिंड - संवाददाता

भिंड पुलिस ने एक 14 माह के बालक को अपहरणकर्ताओं से कुछ ही घंटों में मुक्त कराने में सफलता प्राप्त की है। पुलिस ने सूचना मिलते ही सक्रियता दिखाई और पूरे गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया। इसके चलते अपहरणकर्ता अपने कुत्सित प्रयास में सफल नहीं हो सके और बालक को गांव से करीब 1 किलोमीटर दूर खेत में छोड़कर भाग गए। अब पुलिस अपहरणकर्ताओं की तलाश में जुट गई है। पीएम
जानकारी के मुताबिक मौ थाना क्षेत्र की मखोरी ग्राम पंचायत के पड़रया गांव से रतिराम प्रजापति का 14 माह का अबोध बालक देवांश मंगलवार शाम 6 बजे गायब हो गया। पहले परिजनों और गांव वालों ने बालक को अपने स्तर पर खोजने का प्रयास किया लेकिन जब सफलता नहीं मिली तो करीब रात 9 बजे डायल 100 को सूचना दी। सूचना जैसे ही मौ थाना प्रभारी उदयभान यादव पर पहुंची और उन्होंने आला अधिकारियों को इस बात से अवगत कराया। पुलिस अधीक्षक मनीष खत्री ने बच्चे की आयु और मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से एसडीओपी गोहद सौरभ कुमार और करीब 5थानों के थाना प्रभारियों को दल बल के साथ पड़रया गांव पहुंचने के निर्देश दिए। देखते ही देखते पूरा गांव रात में ही पुलिस छावनी में तब्दील हो गया और कुछ ही देर में स्वयं पुलिस अधीक्षक मनीष खत्री भी मौके पर पहुंच गए। रात में पुलिस ने गांव के चारों ओर घेराबंदी की और सघन तलाशी शुरू कर दी, ग्राम वासियों के सहयोग से गांव के एक-एक घर की तलाशी ली गई और खेतों में भी पुलिस के जवानों को दौड़ाया गया रात भर चली सर्चिंग के बाद में सुबह गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर पड़रया गडरौली मार्ग पर खेत में एक पुलिस जवान को एक बालक के होने की आहट सुनाई दी। देखा तो खेत में बालक देवांश खेल रहा था तत्काल पुलिस ने बालक देवांश को अपने कब्जे में लिया और फिर गांव ले जाकर उसके परिजनों को सुपुर्द कर दिया। बच्चे को सकुशल देखकर बच्चे की मां खुशी के मारे फफक फफक कर रो पड़ी और पूरे गांव में भिंड पुलिस की जय जयकार हो गई। पुलिस अधीक्षक मनीष खत्री ने बताया कि जैसे ही मुझे इस मामले की सूचना मिली तो मैंने मामले की गंभीरता को देखते हुए आसपास के पुलिस कर्मियों को निर्देशित किया और गांव में सघन जांच-पड़ताल शुरू करवाई ,जिसके परिणाम स्वरूप एक अच्छी टीम वर्क से बालक देवांश को अपहरणकर्ताओं के चंगुल से मुक्त कराने में सफलता प्राप्त की।
अब पुलिस इस बात की जांच पड़ताल में जुट गई है कि आखिर अपरहण किसके द्वारा किया गया था और इसके पीछे की वजह क्या थी।
यहां हम बता दें कि बालक देवांश के पिता दिल्ली में गजक का कारोबार करते हैं। बालक देवांश अपनी तीन बहनों में इकलौता भाई है।
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