: ईश्वर को प्राप्त करने का मात्र प्रेम ही साधन : साध्वी सर्वेश्वरी

Admin Tue, Apr 16, 2024

गौरी किनारे श्रीराम मंदिर शाला आश्रम में कथा श्रवण हेतु उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़


भिंड - संवाददाता
हिंदू नव वर्ष एवं नवरात्रि के पावन अवसर पर गौरी सरोवर के किनारे प्राचीन श्री राम जानकी शाला मंदिर पर चल रही कथा के आठवें दिवस पर बोलते हुए परम पूज्य संत श्री अंतरराष्ट्रीय भागवत आचार्य साध्वी सर्वेश्वरी दासी ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य की लौकिक दृष्टि से तो आचरण भ्रष्ट होने से अपवित्रता मानी जाती है, पर वास्तव में जो कुछ अपवित्रता आती है, वह सब-की-सब भगवान् से विमुख होने से ही आती है। जैसे, अंगार अग्नि से विमुख होते ही कोयला बन जाता है। फिर उस कोयले को साबुन लगाकर कितना ही धो लें, तो भी उसका कालापन नहीं मिटता। अगर उसको पुन: अग्नि में रख दिया जाय, तो फिर उसका कालापन नहीं रहता और वह चमक उठता है। ऐसे ही भगवान् के अंश इस जीव में कालापन अर्थात् अपवित्रता भगवान् से विमुख होने से ही आती है। अगर यह भगवान् के सम्मुख हो जाये, तो इसकी वह अपवित्रता सर्वथा मिट जाती है और यह महान् पवित्र हो जाता है तथा दुनिया में चमक उठता है। इसमें इतनी पवित्रता आ जाती है कि भगवान् भी इसे अपना मुकुटमणि बना लेते हैं!
उन्होंने आगे कहा कि
इसी प्रकार शरीर से—किसी भी इन्द्रिय से ऐसी कोई चेष्टा नहीं करनी चाहिये जो वायुमण्डल दूषित करने वाली हो। सारांश यह कि मन को सदा शुद्ध संकल्पों और सत्-विचारों से भरे रखो। वाणी के द्वारा सदा सत्य, हितकर, मधुर और उत्तम वचन बोलो और शरीर से सर्वदा-सर्वथा उत्तम क्रिया करो। इसी में अपना और जगत् का हित है। इसी प्रकार जहाँ ऐसे शुद्ध मन, वाणी और शरीर वाले सज्जन महानुभाव रहते हों, उन्हीं के समीप रहो और उन्हीं का संग करो। न स्वयं बुरा वायुमण्डल पैदा करो और न बुरे वायुमण्डल में निवास ही करो।

हाल ही में हुआ है शाला आश्रम का जीर्णोधार... कब पधारेंगे रामजानकी ?

भिंड के गौरी सरोवर के तट पर हिंदू देव मदिरों की एक बड़ी और भव्य श्रखला है। सर्वाधिक शिव मंदिर है और फिर उनके ही साथ देवी, गणेश, हनुमान और कई श्री राम जानकी मंदिर बने हुए है। कुछ मदिर परोक्ष रूप से दिखाई देते हैं तो कुछ गौरी किनारे के घरों और बस्तियों में कैद हैं। इसी प्रकार का एक मंदिर गौरी के दक्षिणी हिस्से में शाला आश्रम का रामजानकी मंदिर हुआ करता था। लेकिन समय के थपेड़ों के साथ यह मंदिर बिल्कुल जीर्ण शीर्ण हो गया था। लेकिन भगवान को जब अपना कार्य कराना होता है तो उनके भक्त निकल कर सामने आ ही जाते है। कई भक्तों ने इस शाला मंदिर का अब जीर्णोद्धार कराना प्रारंभ कर दिया है। लेकिन यहां राम की स्तापना होना शेष है।

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