: देख सुदामा की दीन दशा करुणा कर के करुणानिधि रोए...

Admin Wed, Jul 26, 2023

सुदामा चरित्र की कथा के साथ भागवत सप्ताह संपन्न
(दंदरौआ धाम के महंत रामदास जी महाराज हुए शामिल)

अनिल भारद्वाज - चित्रकूट (सतना)

दंदरौआ धाम आश्रम चित्रकूट परिसर में दंदरौआ धाम संत श्री १००८ रामदासजी महाराज के आशीर्वाद से परीक्षत लाखाराम मुदगल मेहगांव द्वारा बीस जुलाई से जारी श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह का समापन बुधवार की शाम सुदामा चरित्र की कथा के साथ हुआ। इस दौरान व्यासपीठ पर विराजमान कथावाचक सुरेश शास्त्री मटियावली ने वामनावतार, जड़ भरत,श्रीकृष्ण जन्म,नंद महोत्सव, कृष्ण की बाल लीला,गोवर्धन पूजा,कृष्ण विवाह के वर्णन उपरांत भगवान श्रीकृष्ण एवं उनके बाल सखा सुदामा की मित्रता की कथा सुनाकर उपस्थित श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।अंतिम दिन सुरेश शास्त्री ने बताया कि जहां मित्रता है वहां गरीब-अमीर का भेद-भाव नहीं रहता है। अत्यंत निर्धन होने के बावजूद जब सुदामा भगवान कृष्ण के महल पहुंचते है तो उनका दशा देख कर कृष्ण की आंखों में आंसू आ जाते है।अपनी रानियों के साथ सुदामा के पांव धोकर कृष्ण ने अपने बाल सखा के प्रति आदर भाव प्रदर्शित करते हुए सच्ची मित्रता का भाव प्रदर्शित किया। कृष्ण ने विश्वकर्मा को आदेश देकर सुदामा के गांव में महल बनाया। अपने मित्र पर सर्वस्व सौंपने तक भगवान आतुर रहे।
बच्चो के संस्कार पर चिंता व्यक्त की कथा के दौरान पं सुरेश शास्त्री ने कहा कि आजकल के माहौल में बच्चों को अच्छे संस्कार दे पाना माता-पिता के लिए मुश्किल होता जा रहा है। माता-पिता कितना भी समझा लें बच्चे वही करते हैं, जो उनका मन कहता है, लेकिन अगर शुरू से ही आप अपने बच्चों को समझें और उनका मार्गदर्शन करें, तो आपका बच्चा जरूर आपकी बात मानेगा। बच्चे जो भी व्यवहार करते हैं उसकी जड़ें बचपन से जुड़ी होती हैं। आजकल ज्यादातर सभी की ऐसी आदत बन गयी हैं, जिसमे लोग रात को देर से सोते हैं व सुबह देर से उठते हैं। यह बिल्कुल गलत आदत है जिसका बुरा प्रभाव हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। इसी के साथ सूर्योदय के समय मिलने वाली लाभदायक किरणों के प्रभाव से भी हम वंचित रह जाते हैं। इसलिए ना केवल आप बच्चों में यह आदत डालिए बल्कि स्वयं भी अपनाएं क्योंकि बच्चे हमेशा अपने बड़ो से ही सीखते हैं।
गौमाता की दुर्दशा पर भी चिंता जाहिर की कथा के दौरान पं•शास्त्री ने गौमाता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा गीता के अनुसार, कृष्ण ने अपने चचेरे भाई उद्धव से कहा था कि गाय की पूजा करना उनकी पूजा करने के बराबर है। शुद्ध भारतीय गाय का दूध पीने से हमारा सात्विक स्वभाव बढ़ता है। स्कंद पुराण में कहा गया है कि "केवल गायों को सम्मान देने से व्यक्ति अपने सभी पापों को नष्ट कर सकता है"। इस प्रकार, गायों की सेवा और सुरक्षा करके, हम अपने 'प्रारब्ध' से छुटकारा पा सकते हैं और अपने भीतर की दिव्यता को जागृत कर सकते हैं। गाय की पूजा करने और उसका दूध पीने से मनुष्य का शरीर दिव्य चेतना से भर जाता है। इसलिए घर पर सेवा करे सड़कों पर मरने के लिए खुला न छोड़ें। कथा के दौरान धंदरौआ धाम के संत श्री १००८रामदास जी महाराज, श्री श्री १००८राधिका दास जी महाराज ने आशीर्वाद वचन सुनाए, कथा सुनने मेहगांव सेवादल के नेता ब्रजकिशोर शर्मा कल्लू मुद्गल,कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता डा.अनिल भारद्वाज,पत्रकार मुकेश मिश्रा, समाजसेवी नाथूराम व्यास,महेंद्रमुदगल, अरविंद मुदगल, जितेंद्र मुदगल, श्रीकृष्ण भारद्वाज ने उपस्थित होकर कथा का श्रवण किया।

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