: श्री कृष्ण आत्मा और समस्त वृत्तियां गोपीकाएं : पाठक जी महाराज
Admin Tue, Feb 6, 2024

अवंती बाई गार्डन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिवस उमरी श्रद्धालु श्रोताओं की भीड़
भिंड - संवाददाता
सभी वृत्तीयां गोपीकाएं हैं और भगवान कृष्ण आत्म स्वरूप है। जीव स्वरूप गोपिका जब आत्म स्वरूप कृष्ण के दर्शन करती है तब उसकी सारी वृत्तीयां शांत होकर जीव और ईश्वर की एकता होती है इस एकता रूप अनुभव मिलन से अनंत आनंद का प्रकटीकरण होता है उक्त उद्गार श्रीमद् भागवत कथा आध्यात्मिक ज्ञान यज्ञ को संबोधित करते हुए कथा व्यास संत श्री अनिल पाठक जी महाराज द्वारा दिए गए।
कथा के छठवे दिवस महारास की लीला की व्याख्या करते हुए श्री पाठक जी महाराज ने कहा कि इस अनंत आनंद के प्रकटीकारण से सारा विश्व आनंद विभोर हो जाता है इसी आनंद को महारास कहा गया है महारास अर्थात महा आनंद। श्री पाठक जी ने आगे वर्णन करते हुए कहा कि जिस प्रकार गोपियों ने अपना घर, संबंधी, पुत्र, पिता आदि सभी का मन से त्याग करके भगवान की शरण ग्रहण की थी इसी प्रकार यदि कोई जीव अनन्यता से भगवान की शरण ग्रहण करता है तो उसके जीवन में भी गोपियों की तरह ही महारास घटित होता है यही महारास लीला का गूड़ तत्व है। यहां हम बता दें कि स्थानीय आर्य नगर - भीम नगर चौराहे पर स्तिथ महारानी अवंती बाई धर्मशाला में एक से सात फरवरी तक श्री पाठक जी महाराज के मुखारविंद से कथा आयोजन किया जा रहा हैं। कथा का कल यानि कि 7 फरवरी को अंतिम दिवस है। यहां श्री मद्भागवत कथा के साथ साथ वृंदावन धाम से आई सुंदर रसिक रास लीला का भी आयोजन किया जा रहा है।
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