: नारी शक्ति को भाजपा ने दिया अभूतपूर्व तोहफा : सीमा शर्मा
Fri, Sep 22, 2023
भाजपा कार्यकर्ताओं ने महिला आरक्षण बिल पास होने पर बांटी मिठाई
भिंड - संवाददाता
भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने नारी शक्ति वंदन विधेयक पारित होने पर गोल मार्केट गांधी प्रतिमा पर कार्यकर्ताओं एवं शहरवासियों के बीच मिठाई बांटकर खुशी जताई।
इस अवसर पर भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व जिला अध्यक्ष और ग्वालियर महानगर प्रभारी श्रीमती सीमा शर्मा ने कहा कि लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू होना देश में एक नई क्रांति की शुरूआत है एवं आज हम महिलाओं को न्याय दे रहे हैं. बिल पास करके हम महिलाओं को और सशक्त कर रहे हैं ।
भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष देवेंद्र नरवरिया ने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री मोदी ने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा दिया. महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सहभागिता, जिस दिन मोदी जी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और सरकार बनी, तभी से ये सरकार का श्वास और प्राण दोनों बने हुए हैं ।
भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अतुल रमेश पाठक ने कहा कि अब लोकसभा और विधानसभा में 33 फीसदी सीटों पर महिलाएं चुनाव लड़ सकेंगी. महिला सशक्तिकरण का एक नया अध्याय रचा गया है. इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहुत बहुत बधाई प्रषित करता हूं।
इस अवसर पर मप्र महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष कृष्णकांता तोमर, महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष आभा जैन, जिला मंत्री उपेंद्र राजौरिया, जिला मंत्री रश्मि खटीक, किसान मोर्चा जिला महामंत्री टंटी राजावत, मंडल अध्यक्ष टीपू भदौरिया,अमित जैन एवं शेरू पचौरी, अनिता चोपड़ा,गीता राजावत, बेबी राठौर , महिमा चौहान, उर्मिला गुप्ता, विनोद देवी श्रीवास, मीना राठौर ,पिंकी तिवारी, गुड्डी श्री व्यास, शीला गुड्डी राजावत ,प्रियंका प्रेमवती राठौर ,गुड्डी मिश्रा ,विनोद देवी श्रीवास ,रामवती श्रीवास,मंडल मंत्री प्रशांत सोनी एवं सूरज बरुआ, मंडल अध्यक्ष अवनीश त्रिपाठी,युवा नेता पुष्पेंद्र भारौली, भूपेंद्र ओझा आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।
: चंबल के समृद्ध इतिहास को संजोए हुए है यह "चंबल संग्रहालय,...
Fri, Sep 22, 2023
चंबल के समृद्ध इतिहास को संजोए हुए है चंबल संग्रहालय, पांचवी वर्षगांठ पर दो दिवसीय प्रदर्शनी
पंचनदः पांच नदियों के महासंगम पर
गणेश भारद्वाज - भिंड
चंबल संग्रहालय का पांचवां स्थापना दिवस समारोह मनाया जा रहा है। दो दिवसीय आयोजन में चंबल के इतिहास, संस्कृति, पर्यावरण, समाज आदि से जड़ी महत्वपूर्ण सामग्री को समेटे संरक्षित धरोहरों की प्रदर्शनी आम जन के लिए लगाई गई है। स्थापना दिवस समारोह की शुरुआत रेखा देवी प्रधान, सिद्दीक अली, मनोज सोनी, वीरेंद्र सिंह सेंगर, राज कुमार द्विवेदी, अवधेश सिंह चौहान, प्रमोद सिंह सेंगर ने साझे तौर पर दीप प्रज्वलित करके की।
सांस्कृतिक विरासतों पर संग्रहित दो दिवसीय यह प्रदर्शनी पूरे चंबल अंचल में चर्चा का केन्द्र बनी हैं जिसे लेकर स्थापना समारोह आयोजन समिति से जुड़े लोग खासा उत्साहित हैं। अंचल के विकास क्रम को रेखांकित करती हुई दो दिवसीय प्रदर्शनी में चंबल अंचल से जुड़ा साहित्य, स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज, चंबल अंचल से जुड़ी दुर्लभ वस्तुए, प्राचीन सिक्के, पत्र आदि प्रदर्शित की जा रही है. देश-विदेश के शोधार्थियों के बीच चंबल के समृद्ध और विविध इतिहास की पहुंच के लिए स्थापित संग्रहालय अपने शुरुआती दौर से मुफीद साबित हुआ है। यहां संग्रहित अमूल्य बौद्धिक संपदा का योगदान दर्जनों विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों को मिला है।
चंबल संग्रहालय संस्थापक डॉ.शाह आलम राना ने बताया कि यह संग्रहालय समाज में बिखरे अमूल्य ज्ञान स्रोत सामग्री सहेजने के मिशन में जुटा है। जहां से भी बौद्धिक संपदा मिलने की रोशनी दिखती है, संग्रहालय उन सुधी जनों से निरंतर संपर्क कर रहा है। उन्होंने कहा कि चंबल अंचल से जुड़े इटावा, औरैया, जालौन, बाह, भिंड, मुरैना और धौलपुर से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज, लेटर, गजेटियर, स्मृति चिन्ह, समाचार पत्र, पत्रिका, पुस्तकें, तस्वीरें, पुरस्कार, सामग्री-निशानी, अभिनंदन ग्रंथ, पांडुलिपि को सहेज रहा है। चंबल अंचल में सघन अभियान चलाकर चंबल संग्रहालय की ऐतिहासिक महत्व की बौद्धिक संपदा में बढ़ोत्तरी जारी है। एकत्र संग्रहित समृद्ध ज्ञानकोष को उसी अनुपात में शोधार्थियों के लिए प्रकाशन करने का संकल्प लिया गया है।
चंबल प्रकाशन से अब तक मातृवेदी बागियों की अमरगाथा, बीहड़ में साइकिल, चंबल मेनीफेस्टो, आजादी की डगर पे पांव, कमांडर-इन-चीफ गेंदालाल दीक्षित, बंदूकों का पतझड़, मेरी जेल कहानी, कोरोना कारावास में युवा संघर्ष, बागी सम्राटः मान सिंह से लुक्का तक, भारत छोड़ते हुए छाती फट गई, चंबल पर्यटन आदि पुस्तकें छप चुकी हैं तथा सैकड़ों दस्तावेज डिजिटल संरक्षित किये गये हैं.
संघर्षमय रही चंबल संग्रहालय की यात्रा:
क्रांतिकारी लेखक डॉ. शाह आलम राना ने कहा कि देश के सबसे बड़े गुप्त क्रांतिकारी दल ‘मातृवेदी’ के शताब्दी वर्ष के दौरान 2800 किलोमीटर से अधिक चंबल संवाद यात्रा उन्होंने साइकिल से अकेले की थी। इसी शोध यात्रा के दौरान चंबल संग्रहालय का ख्वाब बुना गया। लिहाजा पांच नदियों के संगम, पंचनदा पर 25 मई 2017 को ‘चंबल जनसंसद’ का आयोजन किया गया था।
जनसंसद में निकली जनसमस्याओं को तीनों राज्यों और केन्द्र सरकार के सामने रखा गया और चंबल संग्रहालय बनाने की मांग की गयी। सरकारी उपेक्षा से आजिज आकर 9 जून 2018 को अंतर्राष्ट्रीय अभिलेख दिवस पर चंबल अंचल के जनसरोकारी लोगों के सामने सामाजिक सहयोग से चंबल संग्रहालय बनाने की मुहर लगी। कर्मयोगी सुंदरलाल के जन्मदिवस पर 26 सितंबर 2018 को चंबल संग्रहालय का विधिवत शुभारंभ इटावा के चौगुर्जी मोहल्ले में हुआ. हालांकि, चंबल संग्रहालय के संघर्ष की यात्रा बड़ी उबड़- खाबड़ रही. दो वर्ष इसे कुशवाहा कालोनी से संचालित किया गया. उसके बाद एक वर्ष तक लाल सेना के कमांडर के गांव लोहिया में पड़ाव रहा. फिर यहां से हटाकर पंचनद शिफ्ट किया गया. इन पांच वर्षों में चंबल संग्रहालय को व्यवस्थित, भव्य और निजी भवन नहीं मिल पाया है.
इस आयोजन के उद्घाटन के अवसर पर राजेंद्र कुमार शर्मा, अमन, गोरेलाल, सुखवीर निषाद, अवलाख सिंह, टीका राम, मान सिंह, राम औतार तिवारी, जगदीश सिंह आदि मौजूद रहे.
: देश की न्यायिक व्यवस्था नजर में ही गोविंदसिंह झूठे, जनता के वफादार कैसे होगे ?
Thu, Sep 21, 2023
डॉ; रमेश दुबे ● नेता प्रतिपक्ष जैसे संवैधानिक पद का सरासर किया जा रहा दुरूपयोग, दे इस्तीफा।
गणेश भारद्वाज - भिण्ड
भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य डॉ. रमेश दुबे ने म.प्र. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे डॉ.गोविंदसिंह को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उनकी फितरत में प्रशासन पर दबाव बनाना शुरू से ही है, उसी गुमान में उन्होनें माननीय उच्च न्यायालय पर उंगली उठाई और पक्षपात का झूठा आरोप लगाया, लेकिन यहां उनको मुंह की खानी पड़ी, क्योंकि माननीय उच्च न्यायालय ने उनके उपर जुर्माना यह कहते हुए लगाया कि उन्होनें जो एप्लिकेशन लगाई है उससे स्पष्ट है कि वह हाईकोर्ट की खण्डपीठ पर झूठे आरोप लगाकर दबाब बनाना चाहते है, उनका कोई अन्य गुप्त उद्देश्य इसमें छिपा है, इसलिए न्यायालय ने उनकी इस गतिविधि को गलत मानते हुए जुर्माना ठोका है।
डॉ. दुबे ने स्पष्ट किया है कि डॉ. गोविंदसिंह महत्वपूर्ण मंत्रालयों को संभाल चुके है वो अपनी आदतों के अनुसार ही इस प्रकार के आचरण करते है, जाति वाद का आरोप दूसरों पर लगाते है जबकि खुद ही जातिवाद फैलाते है, इस बार के विधानसभा चुनाव में आम जनता इसका जबाव जरूर देगी, ऐसी हम सभी आशा ही नही पूर्ण विश्वास भी है। डॉ.रमेश दुबे ने बताया कि पिछले दिनों गोविंदसिंह ने जो आरोप एसपी भिण्ड पर जातिगत नियुक्तियों के संबंध में लगाए है वो उनकी ओछी मानसिकता का प्रतीक है।
क्या पुलिस पर दबाव बनाकर जीते गुजरे चुनाव
रमेश दुबे ने कहा कि वो अपने पिछले कार्यकाल को देखें उन्होनें कितने जिला पुलिस कप्तानों पर दबाव बनाकर अपने चहेतों को थाना इंचार्ज और टीआई बनवाया। डॉ.दुबे ने कहाकि ये जिला पुलिस कप्तान का खुद का सोच और विश्वास होता है कि जिले मैं कानून व्यवस्था ठीक रहे और उनकी ट्यूनिंग सभी थाना प्रभारियों से ठीक रहे उसी के हिसाब से उनके द्वारा थानों में अधिकारी नियुक्त किए
जाते है। चूंकि कांग्रेस की सरकार कार्यकाल में गोविंदसिंह अपनी मनमानी करते रहे है तो उनकी वही आदत आज भी बनी हुई है, जो पहले भी गलत थी और आज भी गलत है।
गोविंदसिंह का यह कहना कि थानों पर जातीय नियुक्तियों से चुनाव जीत जाते है तो वह स्पष्ट करें कि 1998, 2003, 2008, 2013, 2018 में लहार विधानसभा के चुनावों में उनके सजातीय नियुक्त थे तो क्या उन पुलिसकर्मियों ने उन्हें चुनाव जिताए, जबाव दें नेता प्रतिपक्ष ?
जनता सिखाएगी सबक
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रमेश दुबे ने साफ कहा कि डॉ. गोविंदसिंह ने नेता प्रतिपक्ष जैसे संवैधानिक पद की गरिमा को तार-तार किया है, अतः इनको तत्काल नेता प्रतिपक्ष के पद से इस्तीफा देना चाहिए, ताकि कोई असत्य बोलने वाला इस पद पर न रहें, साथ ही उनकी अनुचित, गैर लोकतांत्रिक गतिविधियों और जातिवादी गतिविधियों के लिए आगामी विधानसभा चुनाव में जनता जरूर सबक सिखाएंगी।