: कुसंगति के परिणाम भयंकर और घातक होते हैं : शंकराचार्य
Thu, Apr 11, 2024
श्री राम कथा के तीसरे दिवस बड़ी संख्या में रामकथा श्रवण को उमड़े धार्मिक श्रद्धालू जन
भिण्ड - संवाददाता
कुसंग का परिणाम कितना भयंकर होता है, इसका उदाहरण कैकेयी के चरित्र से होता है। कैकेयी मंथरा के बातों पर विस्वास कर लेती है और वह प्रसन्न होकर के उसकी प्रसंशा करने लगती है। उसका परिणाम यह हुआ कि कैकेयी राम से ही विरोध कर बैठती है। उक्त उद्गार अटेर रोड स्तिथ स्वरूप विद्या निकेतन परिसर में चल रहे नौ दिवसीय श्रीराम कथा ज्ञानयज्ञ को संबोधित करते हुए अनंतश्री विभूषित काशीधर्मपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नारायणानंद तीर्थ महाराज ने व्यक्त किए।
श्री शंकराचार्य ने आगे कथा में कहा कि कैकेयी बहुत ही समझदार थी लेकिन कुसंग के परिणामस्वरूप मंथरा की बातों में आकर के एक अबोध बालिका की तरह कुमार्ग पर चली गई। कुमार्ग का परिणाम कितना भयावह होता है यह अज्ञान में मालूम नहीं होता है इसलिये शास्त्र का श्रवण किया जाता है जिससे पहले से जानकारी हो जाय कि कुमार्ग का फल क्या होता है। किसी को तकलीफ देना, किसी को सताना किसी के वस्तु का हरण कर लेना यह सब कुमार्ग का ही परिणाम है।
उत्तम ग्रंथ तथा महापुरुषों के जीवनव्रत मनुष्य को जीवन निर्माण के लिए प्रेरणा देते हैं। मनुष्य आत्मनिरीक्षण, संकल्प एवं अभ्यास द्वारा सद्गुणों का विकास करके जीवन को उज्ज्वल बना सकता है। समय का सदुपयोग पुरुषार्थ, सत्यनिष्ठा तथा आहार-विहार में सावधानी तथा विवेक का आदर मनुष्य के विवेक को उदात्त बनाते हैं। वास्तव में, अंहकार का क्षीण होना अर्थात अंहकार का उदात्तीकरण अथवा दिव्यिकरण जीवन का परम पुरुषार्थ है।
पूज्य शंकराचार्य जी ने कहा मनुष्य विषयों का भोगों का चिंतन करता है और चिंतन करने से विषयों की कामना पैदा हो जाती है कामना में विघ्न पड़ने पर क्रोध आ जाता है क्रोध उत्पन्न होने पर व्यक्ति हिंसक हो जाता है। जिसका परिणाम विद्रोह है। कामना भोगों का चिंतन करने से उनमें आसक्ति हो जाती है और आसक्ति ही सारे झगड़े की जड़ है। ज्ञानी पुरुषों का जो व्यवहार होता है वह अनासक्त होकर कर्म करते हैं। तथा फल में समत्व की भावना रखते हैं। इसीलिए श्री राम वनवास होने पर आदर्श प्रस्तुत करते हैं। वह माता कैकेयी से कहते हैं महाराज की प्रतिज्ञा का पालन मैं अवश्य करूँगा। महाराज ने यह सब मुझसे क्यों नहीं कहा उनकी आज्ञा होने पर मैं सब कुछ कर सकता हूँ। अविलंब वन में चला जाऊंगा। माता तुम्हारा तो मुझपर पूरा अधिकार है अगर ऐसी बात थी तो मुझसे कह सकती थी। पिता जी से कहकर उनको कितना कष्ट में डाल दिया इससे जान पड़ता है तुम मुझको पराया समझती हो। माता जो होना था हो गया अब ऐसा प्रयत्न करो भरत राज्य का पालन करें पिता का सेवा करें मैं तो वन जाने के लिए तैयार हूँ। राम के वचन सुनकर के दशरथ के दुःख की सीमा नहीं रही, कुछ नहीं बोल सके रोने लगे। पिता की ऐसी दशा देखी नहीं गयी कैकेयी की परिक्रमा किया माता पिता को प्रणाम किया और कौशिल्या के भवन में पहुंच गए। भगवान श्री राम समाज में आदर्श प्रस्तुत करते हैं कि पुत्र का कर्तव्य माता-पिता के साथ कैसा होना चाहिए। भाई का कर्तव्य भाइयों के साथ कैसा होना चाहिए।
कैकेयी द्वारा श्रीराम का वनवास होने पर भी राम के मन में आदर का भाव था। जिससे समाज में प्रेरणा मिलती है कि किसी द्वारा स्वयं का अहित होने पर भी हमें उसकी निंदा नहीं करना चाहिए। निंदा करने से परिवार, समाज एवं राष्ट्र में टकराव होता है, जिसका परिणाम अशांति है।
: किसी को छोटा समझकर उसकी अवज्ञा न करें : नारायणानन्दतीर्थ महाराज
Wed, Apr 10, 2024
भिंड
- संवाददाता
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान् श्री राम की कथा सरिता में अवगाहन करा रहे जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नारायणानन्दतीर्थ जी महाराज।श्री राम कथा के द्वतीय दिवस कथा का अक्षुण्ण प्रवाह बहा। रामायण में प्रसंग आया कि रावण, कुम्भकरन एवं विभूषण ने घनघोर तपस्या की। सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा ने तीनों की अत्यंत प्रशंसनीय तपस्या को देखकर आशीर्वाद देने की इच्छा प्रकट की,तब रावण ने साभिमान वशात् वर मांगते हुए कहा कि मैं प्रभु नर और बानर को कुछ नहीं समझता हूं अतः इनसे मुझे कोई हानी नहीं है।इनसे अतिरिक्त कोई दैवीय शक्ति अन्य मेरे संहार की अवश्यंभावी कारण न बने। चतुर्मुखी ब्रह्मा ने विचार करके आशीर्वाद दे दिया। कालान्तर में नर रूप में नारायण और बानर रूप धरे देवताओं ने सम्पूर्ण विनाश किया। स्वामी जी ने श्री राम जन्म की कथा को बढ़ाते हुए कहा कि राजा दशरथ के के कुलगुरु वशिष्ठ के निर्देशन से पुत्रेष्टि यज्ञ का सम्पादन श्रृंगीऋषि द्वारा हुआ।विद्वान् ब्राह्मणों द्वारा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ में वेद मन्त्रों द्वारा आहुतियां दी गई। भगवान् विष्णु यज्ञगत चारु में प्रविष्ट हो गये। अग्नि भगवान् ने यज्ञान्त में प्रगट होकर खीर चारू प्रदान किये और कहे कि जाओ इसी से तुम्हारी अभीप्सा पूर्ण होगी। रामायण मे गोस्वामी जी कहते हैं
अरध भाग कौसल्यहिं दीन्हा उभय भाग आधे कर लीन्हा।।
चारों अंशानुसार तीनों रानियों ने दिव्यता का आधान किया। साक्षात् भगवान् विष्णु ने दसरथ जी का पुत्र भाव स्वीकार किया।साथ ही ब्रह्मा जी ने सभी देवताओं को हरि की सेवा हेतु पृथ्वी लोक पर अवतरित होने का आदेश दिया।कथा के पूर्व मां अन्नपूर्णेश्वरी वेद अनुसंधान संस्थान के आचार्य एवं बटुको के द्वारा पूज्य गुरुदेव की पादुका पूजन संपादित की गई
: भिंड के पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी ने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष ली भाजपा की सदस्यता
Wed, Apr 10, 2024
पूर्व डीइओ के गांव पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और मुरैना से भाजपा के लोकसभा प्रत्याशी शिवमंगल सिंह तोमर के सामने गांव (तिवरिया रक्षेड) मुरैना और परिवार के कई अन्य लोगों ने भी भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की
भिंड/ मुरैना संवाददाता
भिंड में लंबे समय तक जिला शिक्षा अधिकारी के पद पर पदस्थ रहे हरिभुवन सिंह तोमर ने अपने ही गांव तिवरिया रक्षेड भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। जीवन भर शिक्षा जगत में काम करते हुए विद्यार्थियों को शिक्षा देने और शिक्षा विभाग को चलाने के अनुभव के साथ अब हरिभुवन सिंह तोमर राजनीति के मैदान में पहुंचकर राजनेतिक कखगघ सीखेंगे।
श्री तोमर के साथ उनके परिवार और गांव के कई अन्य लोगों ने भी विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर और लोकसभा प्रत्याशी शिवमंगल सिंह तोमर के सामने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।
श्री तोमर ने एमपी टुडे को बताया कि भाजपा एक कार्यकर्ता को सम्मान और समुचित अधिकार देने वाली पार्टी है। भाजपा की विचारधारा राष्ट्र के उत्थान और विकास की है। भाजपा के तेजस्वी और वैश्विक नेता हमारे प्रधानमंत्री और हमारे अंचल के बड़े नेता श्री नरेंद्र सिंह तोमर के कृतित्व और व्यक्तित्व से प्रभावित होकर अब जीवन पर्यंत भाजपा के वट वृक्ष के नीचे रहने का संकल्प मेरे परिवार और मेरे ग्राम वासियों के द्वारा लिया गया है।